भारत सरकार

संसदीय कार्य मंत्रालय

मंत्रालय में निम्नलिखित पदों के लिए भर्ती नियम

 

संयुक्त सचिव
उप सचिव
अवर सचिव
प्रधान निजी सचिव
अनुभाग अधिकार
हिन्दी अधिकारी
निजी सचिव
सहायक
लेखापाल
अनुसंधान सहायक
व्यैक्तिक सहायक

 

 

 

 

 

 

अधिसूचना
संसदीय कार्य मंत्रालय
नई दिल्ली, 8 फरवरी, 2002


        सा0का0नि0 56 - राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 309 के परंतुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और संसदीय कार्य मंत्रालय (भर्ती और सेवा शर्तें ) नियम 1963 को जहां तक उनका संबंध संयुक्त सचिव के पद से है, उन बातों के सिवाय अधिक्रांत करते हुए, जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पहले किया गया है या करने का लोप किया गया है, संसदीय कार्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर भर्ती की पद्धति का विनियमन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाते हैं, अर्थात् :-

        1 संक्षिप्त नाम और प्रारंभ: (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम संसदीय कार्य मंत्रालय, संयुक्त सचिव भर्ती नियम, 2002 है ।
                                               (2) ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रवृत होंगे।


        2. पद-संख्या, वर्गीकरण और वेतनमान : उक्त पदों पर भर्ती की संख्या, उनका वर्गीकरण और उनके वेतनमान वे होंगे, जो इन नियमों से

            उपाबद्ध अनुसूची के स्तंभ 2 से स्तंभ 4 में विनिर्दिष्ट हैं ।


        3. भर्ती की पद्धति, आयु-सीमा, अर्हताएं आदि : उक्त पदों पर भर्ती की पद्धति, आयु-सीमा, अर्हताएं और उससे संबंधित अन्य बातें वे होंगी

            जो उक्त अनुसूची के स्तंभ 5 से स्तंभ 14 में विनिर्दिष्ट हैं ।


        4. निरर्हता : वह व्यक्ति -
                   (क) जिसने ऐसे व्यक्ति से जिसका पति या जिसकी पत्नी जीवित है, विवाह किया है, या
                  (ख) जिसने अपने पति या अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी व्यक्ति से विवाह किया है,उक्त पद पर नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।
 

        परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा विवाह ऐसे व्यक्ति और विवाह के अन्य पक्षकार को लागू स्वीय विधि के अधीन अनुज्ञेय है और ऐसा करने के लिए अन्य आधार हैं तो वह किसी व्यक्ति को इस नियम के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी ।


        5. शिथिल करने की शक्ति : - जहां केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है, वहां वह उसके लिए जो कारण

            हैं उन्हें लेखबद्ध करके, तथा संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श करके, इन नियमों के किसी उपबंध को किसी वर्ग या प्रवर्ग के व्यक्तियों

            की बाबत, आदेश द्वारा शिथिल कर सकेगी ।


        6. व्यावृत्ति:- इन नियमों की कोई बात, ऐसे आरक्षण, आयु-सीमा में छूट और रियायतों पर प्रभाव नहीं डालेगी, जिनका केन्द्रीय सरकार द्वारा

            इस संबंध में समय-समय पर निकाले गए आदेशों के अनुसार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, भूतपूर्व

            सैनिकों और अन्य विशेष प्रवर्ग के व्यक्तियों के लिए उपबंध करना अपेक्षित है ।


अनुसूची

पद का नाम पदों की संख्या वर्गीकरण वेतनमान

चयन-सह-ज्येष्टता या योग्यता के आधार पर चयन अथवा अचयन पद
 

सीधे भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए आयु सीमा
 
(1) (2) (3) (4) (5) (6)
संयुक्त सचिव *1 (2002)

*कार्यभार के आधार पर परिवर्तन किया जा सकता है ।

साधारण केन्द्रीय सेवा समूह ``क`` राजपत्रित, अननुसचिवीय
 
रू . 18400-500-22400
 
योग्यता के आधार पर चयन
 
लागू नहीं होता
 
सेवा में जोड़े गए वर्षों का फायदा केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन नियमावली, 1972 के नियम 30 के अधीन अनुज्ञेय हैं या नहीं
 
सीधे भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए अपेक्षित शैक्षिक और अन्य अर्हताएं
 
सीधे भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए विहित आयु और शैक्षिक अर्हताएं प्रोनत व्यक्तियों की दशा में लागू होंगी या नहीं
 
परिवीक्षा की अवधि यदि कोई हो
 
भर्ती की पद्धति: भर्ती सीधे होगी या प्रोनति द्वारा या प्रतिनियुक्ति/आमेलन द्वारा तथा विभिन पद्धतियों द्वारा भरे जाने वाले पदों की प्रतिशतता
 
प्रोनति/प्रतिनियुक्ति/आमेलन द्वारा भर्ती की दशा में वे श्रेणियों जिनसे प्रोनति/प्रतिनियुक्ति/आमेलन किया जाएगा
 
(7) (8) (9) (10) (11) (12)
लागू नहीं होता
 
लागू नहीं होता
 
लागू नहीं होता
 
कुछ नहीं
 
प्रोनति जिसके न हो सकने पर प्रतिनियुक्ति द्वारा।
 
प्रोनति :- ऐसे उप सचिव, जिसने उस श्रेणी में आठ वर्ष नियमित सेवा की है।


टिप्पण :- जहां ऐसे कनिष्ठ व्यक्तियों के संबंध में, जिन्होंने अपनी अर्हक/पात्रता सेवा पूरी कर ली है, प्रोनति के लिए विचार किया जा रहा हो वहां उनसे ज्येष्ठ व्यक्तियों के संबंध में भी विचार किया जाएगा परन्तु यह तब जब कि उनके द्वारा की गई ऐसी अर्हक या पात्रता सेवा, अपेक्षित अर्हक या पात्रता सेवा के आधे से अधिक से या दो वर्ष से, इनमें से जो भी कम हो, कम न हो और प्रोनति के लिए अपनी परिवीक्षा की अवधि सफलतापूर्वक पूरी कर ली हो ।


प्रतिनियुक्ति :- केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकारों या संघ राज्य क्षेत्रों के अधीन ऐसे अधिकारी :-


(क) (i) जो मूल काडर/विभाग में नियमित आधार पर सदृश पद धारण किए हुए हैं, या


(ii) जिन्होंने मूल काडर या विभाग में 16400-20000 रू . के या समतुल्य वेतनमान वाले पदों पर नियमित आधार पर नियुक्ति के पश्चात् उस श्रेणी में दो वर्ष की सेवा की है, या


(iii) जिन्होंने मूल काडर या विभाग में 14300-16500 रू . के या समतुल्य वेतनमान वाले पदों पर नियमित आधार पर नियुक्ति के पश्चात् उस श्रेणी में तीन वर्ष की सेवा की है, और


(iv) जिन्होंने मूल काडर या विभाग में 12000 - 16500 रू के या समतुल्य वेतनमान वाले पदों पर नियमित आधार पर नियुक्ति के पश्चात् उस श्रेणी में आठ वर्ष की सेवा की है, और


(ख) जिनके पास पन्द्रह वर्ष का प्रशासनिक अनुभव है जिसमें संसदीय या विधायी कृत्यों में पांच वर्ष का अनुभव सम्मिलित है ।


प्रोषक प्रवर्ग के ऐसे विभागीय अधिकारी, जो प्रोनति की सीधी पंक्ति में हैं, प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति के लिए विचार किए जाने के पात्र नहीं होंगे । इसी प्रकार प्रतिनियुक्ति व्यक्ति प्रोनति द्वारा नियुक्ति के लिए विचार किए जाने के पात्र नहीं होंगे ।


प्रतिनियुक्ति की अवधि, जिसके अंतर्गत केन्द्रीय सरकार के उसी या किसी अन्य संगठन/विभाग में इस नियुक्ति से ठीक पहले धारित किसी अन्य काडर बाह्य पद पर प्रतिनियुक्ति की अवधि है, पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी । प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तारीख को 56 वर्ष से अधिक नहीं होगी
 

यदि विभागीय प्रोनति समिति है तो उसकी संरचना
 
भर्ती करने में किन परिस्थितियों में संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श किया जाएगा
 
       
(13) (14)        
1. अघ्यक्ष/सदस्य, संघ लोक सेवा आयोग - अध्यक्ष


2. सचिव, संसदीय कार्य मंत्रालय - सदस्य


3. अवर सचिव (पेंशन ), कार्मिक और - सदस्य
प्रशिक्षण विभाग

प्रतिनियुक्ति के आधार पर राज्य सरकारों या संघ राज्य क्षेत्रों से अधिकारियों की नियुक्ति करते समय संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श करना आवश्यक है ।        


टिप्पण :- मूल नियम, भारत के राजपत्र में अघिसूचना सं.सा.का.नि. 1850 तारीख 29 नवम्बर, 1963 द्वारा प्रकाशित हुए थे और उनमें समय-समय पर पश्चात्वर्ती संशोधन किए गए और अंतिम ऐसा संशोधन अधिसूचना सं.सा.का.नि. 260 तारीख 3 जून 1996 द्वारा हुआ था ।
 

[फा.सं. एफ 4(1)/2001-प्रशासन]
पी. एस. मल्होत्रा, अवर सचिव

अधिसूचना
संसदीय कार्य मंत्रालय
नई दिल्ली, 1 फरवरी, 2002


        सा0का0नि0 36 - राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 309 के परंतुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और संसदीय कार्य मंत्रालय (भर्ती और सेवा शर्तें ) नियम 1963 को जहां तक उनका संबंध उप सचिव के पद से है, उन बातों के सिवाय अधिक्रांत करते हुए, जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पहले किया गया है या करने का लोप किया गया है, संसदीय कार्य मंत्रालय में उप सचिव के पद पर भर्ती की पद्धति का विनियमन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाते हैं, अर्थात् :-


        1 संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ .- (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम संसदीय कार्य मंत्रालय, उप सचिव भर्ती नियम, 2002 है ।
                              (2) ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त्त होंगे।
 

        2. पद-संख्या, वर्गीकरण और वेतनमान :- उक्त पद की संख्या, उसका वर्गीकरण और उसका वेतनमान वह होगा, जो इन नियमों से    

            उपाबद्ध अनुसूची के स्तंभ 2 से स्तंभ 4 में विनिर्दिष्ट हैं ।


        3. भर्ती की पद्धति, आयु-सीमा, अर्हताएं आदि : उक्त पदों पर भर्ती की पद्धति, आयु-सीमा, अर्हताएं और उनसे संबंधित अन्य बातें वे

            होंगी जो उक्त अनुसूची के स्तंभ 5 से स्तंभ 14 में विनिर्दिष्ट हैं ।


        4. निरर्हता : वह व्यक्ति -
         (क) जिसने ऐसे व्यक्ति से जिसका पति या जिसकी पत्नी जीवित है, विवाह किया है, या
         (ख) जिसने अपने पति या अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी व्यक्ति से विवाह किया है,उक्त पद पर नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।
 

        परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा विवाह ऐसे व्यक्ति और विवाह के अन्य पक्षकार को लागू स्वीय विधि के अधीन अनुज्ञेय है और ऐसा करने के लिए अन्य आधार हैं तो वह किसी व्यक्ति को इस नियम के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी ।
 

        5. शिथिल करने की शक्ति : - जहां केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है, वहां वह उसके लिए जो कारण हैं उन्हें लेखबद्ध करके, तथा संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श करके, इन नियमों के किसी उपबंध को किसी वर्ग या प्रवर्ग के व्यक्तियों की बाबत, आदेश द्वारा शिथिल कर सकेगी ।
 

        6. व्यावृत्ति:- इन नियमों की कोई बात, ऐसे आरक्षण, आयु-सीमा में छूट और अन्य रियायतों पर प्रभाव नहीं डालेगी, जिनका केन्द्रीय सरकार द्वारा इस संबंध में समय-समय पर निकाले गए आदेशों के अनुसार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, भूतपूर्व सैनिकों और अन्य विशेष प्रवर्ग के व्यक्तियों के लिए उपबंध करना अपेक्षित है ।

अनुसूची

पद का नाम पदों की संख्या वर्गीकरण वेतनमान चयन-सह-ज्येष्टता या योग्यता के आधार पर चयन अथवा अचयन पद सीधे भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए आयु सीमा
(1) (2) (3) (4) (5) (6)
उप सचिव *3 (2002)
*कार्यभार के आधार पर परिवर्तन किया जा सकता है ।
साधारण केन्द्रीय सेवा समूह ``क`` राजपत्रित, अननुसचिवीय रू . 12000-375-16500 योग्यता के आधार पर चयन लागू नहीं होता
सेवा में जोड़े गए वर्षों का फायदा केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन ) नियम, 1972 के नियम 30 के अधीन अनुज्ञेय हैं या नहीं सीधे भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए अपेक्षित शैक्षिक और अन्य अर्हताएं सीधे भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए विहित आयु और शैक्षिक अर्हताएं प्रोनत व्यक्तियों की दशा में लागू होंगी या नहीं परिवीक्षा की अवधि यदि कोई हो
 
भर्ती की पद्धति: भर्ती सीधे होगी या प्रोनति द्वारा या प्रतिनियुक्ति/आमेलन द्वारा तथा विभिन पद्धतियों द्वारा भरे जाने वाले पदों की प्रतिशतता प्रोनति/प्रतिनियुक्ति/आमेलन द्वारा भर्ती की दशा में वे श्रेणियों जिनसे प्रोनति/प्रतिनियुक्ति/आमेलन किया जाएगा
(7) (8) (9) (10) (11) (12)
लागू नहीं होता लागू नहीं होता लागू नहीं होता कुछ नहीं प्रोनति जिसके न हो सकने पर प्रतिनियुक्ति द्वारा। प्रोनति :- ऐसे अवर सचिव, जिसने उस श्रेणी में पांच वर्ष नियमित सेवा की है।


टिप्पण :- जहां ऐसे कनिष्ठ व्यक्तियों के संबंध में, जिन्होंने अपनी अर्हक/पात्रता सेवा पूरी कर ली है, प्रोनति के लिए विचार किया जा रहा हो वहां उनसे ज्येष्ठ व्यक्तियों के संबंध में भी विचार किया जाएगा परन्तु यह तब जबकि उनके द्वारा की गई ऐसी अर्हक/पात्रता सेवा, अपेक्षित अर्हक/पात्रता सेवा के आधे से अधिक से या दो वर्ष से, इनमें से जो भी कम हो, कम न हो उन्होंने अपने ऐसे कनिष्ट व्यक्तियों सहित जिन्होंने ऐसी अर्हक/पात्रता सेवा पहले ही पूरी कर ली है, अगली उच्चतर श्रेणी में प्रोनति के लिए अपनी परिवीक्षा की अवधि सफलतापूर्वक पूरी कर ली हो ।


प्रतिनियुक्ति :- केन्द्रीय राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों के अधीन ऐसे अधिकारी :-


(क) (i) जो मूल काडर/विभाग में नियमित आधार पर सदृश पद धारण किए हुए हैं, या


(ii) जिन्होंने मूल काडर या विभाग में 10000-15200 रू . के या समतुल्य वेतनमान में नियमित आधार पर नियुक्ति के पश्चात् उस श्रेणी में पांच वर्ष की सेवा की है, और


(ख) जिनके पास प्रशासन संबंधी दस वर्ष का अनुभव है जिसमें संसदीय या विधायी कृत्यों में तीन वर्ष का अनुभव सम्मिलित है ।


पोषक प्रवर्ग के ऐसे विभागीय अधिकारी, जो प्रोनति की सीधी पंक्ति में हैं, प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति के लिए विचार किए जाने के पात्र नहीं होंगे । इसी प्रकार प्रतिनियुक्ति व्यक्ति प्रोनति द्वारा नियुक्ति के लिए विचार किए जाने के पात्र नहीं होंगे ।


प्रतिनियुक्ति की अवधि, जिसके अंतर्गत केन्द्रीय सरकार के उसी या किसी अन्य संगठन/विभाग में इस नियुक्ति से ठीक पहले धारित किसी अन्य काडर बाह्य पद पर प्रतिनियुक्ति की अवधि है, साधारणतया तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी ।


प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तारीख को 56 वर्ष से अधिक नहीं होगी ।
 

यदि विभागीय प्रोनति समिति है तो उसकी संरचना भर्ती करने में किन परिस्थितियों में संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श किया जाएगा        
(13) (14)        
1. अघ्यक्ष/सदस्य, संघ लोक सेवा आयोग - अध्यक्ष
 

2. सचिव, संसदीय कार्य मंत्रालय - सदस्य
 

3. उप सचिव, संसदीय कार्य मंत्रालय - सदस्य

प्रतिनियुक्ति के आधार पर राज्य सरकारों या संघ क्षेत्रों से अधिकारियों की नियुक्ति करते समय संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श करना आवश्यक है।        


[फा.सं. एफ 4(1)/2001-प्रशासन]
पी. एस. मल्होत्रा, अवर सचिव


टिप्पण :- मंत्रालय के मूल नियम, भारत के राजपत्र में अघिसूचना सं.सा.का.नि. 1850 तारीख 29 नवम्बर, 1963 द्वारा प्रकाशित किए गए और उसके पश्चात समय-समय पर संशोधन किए गए तथा ऐसा अंतिम संशोधन अधिसूचना सं.सा.का.नि. 347 तारीख 24 मई, 1990 द्वारा किया गया ।


 

 अधिसूचना
संसदीय कार्य मंत्रालय
नई दिल्ली, 1 फरवरी, 2002

    सा0का0नि0 37 - राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 309 के परंतुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और संसदीय कार्य मंत्रालय (भर्ती और सेवा शर्तें ) नियम 1963 को जहां तक उनका संबंध अवर सचिव के पद से है, उन बातों के सिवाय अधिक्रांत करते हुए, जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पहले किया गया है या करने का लोप किया गया है, संसदीय कार्य मंत्रालय में अवर सचिव के पद पर भर्ती की पद्धति का विनियमन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाते हैं, अर्थात् :-

    1 संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ .- (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम संसदीय कार्य मंत्रालय, अवर सचिव भर्ती नियम, 2002 है ।
                           (2) ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त्त होंगे।

    2. पद-संख्या, वर्गीकरण और वेतनमान :- उक्त पद की संख्या, उसका वर्गीकरण और उसका वेतनमान वह होगा, जो इन नियमों से उपाबद्ध   

        अनुसूची के स्तंभ 2 से स्तंभ 4 में विनिर्दिष्ट हैं ।

    3. भर्ती की पद्धति, आयु-सीमा, अर्हताएं आदि : उक्त पद पर भर्ती की पद्धति, आयु-सीमा, अर्हताएं और उनसे संबंधित अन्य बातें वे होंगी जो

        उक्त अनुसूची के स्तंभ 5 से स्तंभ 14 में विनिर्दिष्ट हैं ।

    4. निरर्हता : वह व्यक्ति -

        (क) जिसने ऐसे व्यक्ति से जिसका पति या जिसकी पत्नी जीवित है, विवाह किया है, या
        (ख) जिसने अपने पति या अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी व्यक्ति से विवाह किया है,उक्त पद पर नियुक्ति का पात्र नहीं होगा ।

    परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा विवाह ऐसे व्यक्ति और विवाह के अन्य पक्षकार को लागू स्वीय विधि

    के अधीन अनुज्ञेय है और ऐसा करने के लिए अन्य आधार हैं तो वह किसी व्यक्ति को इस नियम के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी ।

    5. शिथिल करने की शक्ति : - जहां केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है, वहां वह उसके लिए जो

        कारण हैं उन्हें लेखबद्ध करके, तथा संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श करके, इन नियमों के किसी उपबंध को किसी वर्ग या प्रवर्ग के

        व्यक्तियों की बाबत, आदेश द्वारा शिथिल कर सकेगी ।

    6. व्यावृत्ति:- इन नियमों की कोई बात, ऐसे आरक्षण, आयु-सीमा में छूट और अन्य रियायतों पर प्रभाव नहीं डालेगी, जिनका केन्द्रीय

        सरकार द्वारा इस संबंध में समय-समय पर निकाले गए आदेशों के अनुसार अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े

        वर्गों, भूतपूर्व सैनिकों और अन्य विशेष प्रवर्ग के व्यक्तियों के लिए उपबंध करना अपेक्षित है ।
 

अनुसूची

पद का नाम पदों की संख्या वर्गीकरण वेतनमान चयन-सह-ज्येष्टता या योग्यता के आधार पर चयन अथवा अचयन पद सीधे भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए आयु सीमा
अवर सचिव *6 (2002)

*कार्यभार के आधार पर परिवर्तन किया जा सकता है ।
साधारण केन्द्रीय सेवा समूह ``क`` राजपत्रित, अननुसचिवीय रू . 10000-325-15200 चयन सह ज्येष्ठता लागू नहीं होता
सेवा में जोड़े गए वर्षों का फायदा केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन ) नियम, 1972 के नियम 30 के अधीन अनुज्ञेय हैं या नहीं सीधे भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए अपेक्षित शैक्षिक और अन्य अर्हताएं सीधे भर्ती किए जाने वाले व्यक्तियों के लिए विहित आयु और शैक्षिक अर्हताएं प्रोनत व्यक्तियों की दशा में लागू होंगी या नहीं परिवीक्षा की अवधि, यदि कोई हो भर्ती की पद्धति: भर्ती सीधे होगी या प्रोनति द्वारा या प्रतिनियुक्ति/आमेलन द्वारा तथा विभिन पद्धतियों द्वारा भरे जाने वाले पदों की प्रतिशतता प्रोनति/प्रतिनियुक्ति/आमेलन द्वारा भर्ती की दशा में वे श्रेणियों जिनसे प्रोनति/प्रतिनियुक्ति/आमेलन किया जाएगा
(7) (8) (9) (10) (11) (12)
लागू नहीं होता लागू नहीं होता लागू नहीं होता प्रोनति किए गए व्यक्तियों के लिए दो वर्ष प्रोनति जिसके न हो सकने पर प्रतिनियुक्ति द्वारा । प्रोनति :- ऐसे अनुभाग अधिकारी, जिसने उस श्रेणी में आठ वर्ष नियमित सेवा की है।

टिप्पण :- जहां ऐसे कनिष्ठ व्यक्तियों के संबंध में, जिन्होंने अपनी अर्हक/पात्रता सेवा पूरी कर ली है, प्रोनति के लिए विचार किया जा रहा हो वहां उनसे ज्येष्ठ व्यक्तियों के संबंध में भी विचार किया जाएगा परन्तु यह तब जबकि उनके द्वारा की गई ऐसी अर्हक/पात्रता सेवा, अपेक्षित अर्हक/पात्रता सेवा के आधे से अधिक से या दो वर्ष से, इनमें से जो भी कम हो, कम न हो उन्होंने अपने ऐसे कनिष्ट व्यक्तियों सहित जिन्होंने ऐसी अर्हक/पात्रता सेवा पहले ही पूरी कर ली है, अगली उच्चतर श्रेणी में प्रोनति के लिए अपनी परिवीक्षा की अवधि सफलतापूर्वक पूरी कर ली हो ।

प्रतिनियुक्ति :- केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकारों या संघ राज्य क्षेत्रों के अधीन ऐसे अधिकारी :-

(क) (i) जो मूल काडर/विभाग में नियमित आधार पर सदृश पद धारण किए हुए हैं, या

(ii) जिन्होंने मूल काडर या विभाग में 6500-10500 रू . के या समतुल्य वेतनमान में नियमित आधार पर नियुक्ति के पश्चात् उस श्रेणी में आठ वर्ष की सेवा की है, और

(ख) जिनके पास प्रशासन संबंधी पांच वर्ष का अनुभव है जिसमें संसदीय या विधायी कृत्यों में एक वर्ष का अनुभव भी सम्मिलित है ।

पोषक प्रवर्ग के ऐसे विभागीय अधिकारी, जो प्रोनति की सीधी पंक्ति में हैं, प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति के लिए विचार किए जाने के पात्र नहीं होंगे । इसी प्रकार प्रतिनियुक्ति व्यक्ति प्रोनति द्वारा नियुक्ति के लिए विचार किए जाने के पात्र नहीं होंगे ।

प्रतिनियुक्ति की अवधि, जिसके अंतर्गत केन्द्रीय सरकार के उसी या किसी अन्य संगठन/विभाग में इस नियुक्ति से ठीक पहले धारित किसी अन्य काडर बाह्य पद पर प्रतिनियुक्ति की अवधि है, साधारणतया तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी ।

प्रतिनियुक्ति पर नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तारीख को 56 वर्ष से अधिक नहीं होगी ।
यदि विभागीय प्रोनति समिति है तो उसकी संरचना भर्ती करने में किन परिस्थितियों में संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श किया जाएगा        
(13) (14)        
1. अघ्यक्ष/सदस्य, संघ लोक सेवा आयोग - अध्यक्ष

2. सचिव, संसदीय कार्य मंत्रालय - सदस्य

3. उप सचिव, संसदीय कार्य मंत्रालय - सदस्य
संघ लोक सेवा आयोग से परामर्श करना आवश्यक है ।        
           


[फा.सं. एफ 4(1)/2001-प्रशासन]
पी. एस. मल्होत्रा, अवर सचिव
 

    टिप्पण :- मंत्रालय के मूल नियम, भारत के राजपत्र में अघिसूचना सं.सा.का.नि. 1850 तारीख 29 नवम्बर, 1963 की अधिसूचना द्वारा

    प्रकाशित किए गए और उसके पश्चात समय-समय पर संशोधन किए गए तथा ऐसा अंतिम संशोधन अधिसूचना सं.सा.का.नि. 260 तारीख 3

    जून, 1996 द्वारा किया गया ।


 

अधिसूचना
संसदीय कार्य मंत्रालय
नई दिल्ली, 8 नवम्बर, 2001



    सा. का. नि. 840(अ) - राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और संसदीय कार्य मंत्रालय     (भर्ती और सेवा शर्तें ) नियम, 1963 को, जहां तक उनका संबंध प्रधान निजी सचिव के पद से है, उन बातों के सिवाय अधिक्रांत करते हुए, जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पहले किया गया है या करने से लोप किया गया है संसदीय कार्य मंत्रालय में प्रधान निजी सचिव के पद पर भर्ती की पद्वति का विनियम करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाते हैं, अर्थात्:-

    1 संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ : (1) इन नियमों का सेक्षिप्त नाम संसदीय कार्य मंत्रालय, प्रधान निजी सचिव भर्ती नियम, 2001 होगा ।
                          (2) ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रव़ृत होंगे ।

    2 पद-संख्या, वर्गीकरण और वेतनमान :- उक्त पद की संख्या, उसका वर्गीकरण और उसका वेतनमान वह होगा, जो इन नियमों से उपाबद्व

        अनुसूची के स्तम्भ (2) से स्तम्भ (4) में विनिर्दिष्ट है।

    3 भर्ती की पद्वति, आयु-सीमा और अर्हताएं आदि:- उक्त पद पर भर्ती की पद्वति, आयु-सीमा, अर्हताएं और उससे सम्बन्धित अन्य बातें वे

        होंगी जो उक्त अनुसूची के स्तम्भ (5) से स्तम्भ (14) में विनिर्दिष्ट हैं।

    4 निरर्हता :- वह व्यक्ति, -

        (क) जिसने ऐसे व्यक्ति से, जिसका पति या जिसकी पत्नी जीवित है, विवाह किया है, या
        (ख) जिसने अपने पति या अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी व्यक्ति से विवाह किया है,

उक्त पद पर नियुक्ति का पात्र नहीं होगा :

    परन्तु यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसा विवाह ऐसे व्यक्ति और विवाह के अन्य पक्षकार को लागू स्वीय विधि

    के अधीन अनुळ्ोय है और ऐसा करने के लिç